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अब कॉलेजों को ही सौंपने की तैयारी में सरकार आॅनलाइन फीस भुगतान की जिम्मेदारी

उच्च शिक्षा विभाग कॉलेजों के खातों में करता था पैसा ट्रांसफर

Post Name : सत्र 2017-18 में फीस जमा करने के लिए छात्र हुए थे परेशान

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सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों में सत्र 2018-19 की एडमिशन प्रक्रिया के लिए आॅनलाइन फीस भुगतान की जिम्मेदारी राज्य शासन कॉलेजों को ही सौंपने की तैयारी में है। कॉलेजों को अपने स्तर पर ही छात्रों की फीस का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करना पड़ सकता है। 

सत्र 2017-18 की एडमिशन प्रक्रिया के दौरान आई तकनीकी दिक्कतों से सबक लेते हुए उच्च शिक्षा विभाग इस बार फीस भुगतान की जिम्मेदारी खुद उठाने के बजाए कॉलेजों को ही देने की तैयारी कर रहा है। गुरुवार को होने वाली उच्च शिक्षा की समीक्षा बैठक में यह प्रस्ताव लीड कॉलेजों के प्राचार्यों और अतिरिक्त संचालकों के सामने रखा जाएगा। चालू सत्र की एडमिशन प्रक्रिया के दौरान फीस का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से किया गया था। विभाग ने ऑनलाइन फीस ट्रांजेक्शन के तहत बैंक के डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, इंटरनेट बैंकिंग व ऑनलाइन प्रिंटेड चालान की सुविधा दी थी। यह भुगतान ऑनलाइन एडमिशन पाेर्टल के माध्यम से ही किया जाना था। लेकिन छात्रों को समय पर फीस जमा कराने के लिए इंटरनेट कैफे और कियोस्क सेंटर को 500 रुपए तक अतिरिक्त फीस का भुगतान करना पड़ा था। कॉलेजाें के भी बैंक अकाउंट अपडेट नहीं होने के कारण विभाग को छात्रों की फीस कॉलेजों के खातों में ट्रांसफर करने में मशक्कत करनी पड़ी थी। 

विभाग ट्रांसफर करता था कॉलेजों के खातों में फीस 
विभाग के नियम के अनुसार छात्रों की फीस कॉलेज के बजाए पहले उच्च शिक्षा विभाग के खाते में जमा होती थी। बाद में विभाग कॉलेज के खाते में संबंधित छात्र की फीस ट्रांसफर करता था। बताया जाता है कि इस पूरी प्रक्रिया को लेकर छात्रों के साथ ही कॉलेजों और विभाग को भी तकनीकी परेशानी का सामना करना पड़ा था। शुरूआती चरण में ही फीस जमा करने की ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी तरह ठप पड़ गई थी। एडमिशन पोर्टल पर पेमेंट का लिंक ही नहीं खुला पाया था। छात्रों और पेरेंट्स को एमपी ऑनलाइन के कियोस्क सेंटर से लेकर कॉलेज तक के चक्कर काटने पड़े थे। 

कॉलेजों से पूछा- क्या कठिनाइयां आएंगी 
विभागीय अधिकारियों के अनुसार इस समस्या को देखते हुए उच्च शिक्षा विभाग इस बार फीस जमा करने की सारी जिम्मेदारी कॉलेजों को देने जा रहा है। इसके लिए कॉलेजों से फीड बैक मांगा गया है। पूछा गया है कि यदि फीस का ऑनलाइन भुगतान कॉलेज स्तर पर ही किया जाता है तो क्या कठिनाइयां आएंगी। इसके साथ ही पिछले साल एडमिशन के दौरान आई तकनीकी दिक्कतों को दूर करने से संबंधित सुझाव मांगे गए हैं। बैठक में सीट वृद्धि और एक से अधिक भुगतान की हालिया स्थिति की जानकारी पर भी चर्चा होगी। 

भास्कर न्यूज

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